अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जड़ चेतन मग जीव घनेरे। जे चितए प्रभु जिन्ह प्रभु हेरे।।
मूल पाठ
जड़ चेतन मग जीव घनेरे। जे चितए प्रभु जिन्ह प्रभु हेरे।।
ते सब भए परम पद जोगू। भरत दरस मेटा भव रोगू।।
स्रोत अभिलेख 2.217 · पुस्तक पृ. 524, 524
भावार्थ
मूल पाठ के बादरास्तेमें असंख्य जड़-चेतन जीव थे। उनमेंसे जिनको प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने देखा, अथवा जिन्होंने प्रभु श्रीरामचन्द्रजीको देखा वे सब [उसी समय] परमपदके अधिकारी हो गये। परन्तु अब भरतजीके दर्शनने तो उनका भव (जन्म-मरण)-रूपी रोग मिटा ही दिया। [श्रीरामदर्शनसे तो वे परमपदके अधिकारी ही हुए थे, परन्तु भरतदर्शनसे उन्हें वह परमपद प्राप्त हो गया]॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 524 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जड़ चेतन मग जीव घनेरे। जे चितए प्रभु जिन्ह प्रभु हेरे।।
English explanation
AI draft: Along the way were many insentient and sentient beings—those upon whom the Lord looked and those who saw him—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जड़ | जड़, अचेतन | insentient |
| चेतन | चेतन, सचेत | sentient |
| मग | मार्ग में | along the way |
| जीव | जीव या अस्तित्व | beings |
| घनेरे | बहुत-से | numerous |
| जे | जिन्हें | those whom |
| चितए | देखा | looked upon |
| प्रभु | प्रभु भरत ने | Lord Bharata |
| जिन्ह | जिन्होंने | those who |
| प्रभु | प्रभु भरत को | Lord Bharata |
| हेरे | देखा | saw |
2 ते सब भए परम पद जोगू। भरत दरस मेटा भव रोगू।।
English explanation
They all became fit for the supreme state; the sight of Bharata removed the affliction of worldly bondage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| सब | सभी | all |
| भए | हो गए | became |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| पद | आध्यात्मिक अवस्था, मुक्ति-पद | spiritual state of liberation |
| जोगू | योग्य | fit for |
| भरत | राम के भाई भरत के | of Bharata, Rama’s brother |
| दरस | दर्शन ने | the sight |
| मेटा | मिटा दिया | removed |
| भव | संसार-बंधन का | of worldly bondage |
| रोगू | रोग | affliction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.217
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 524
- सहायक विषय
- इन्द्र-बृहस्पति-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 524, 524
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।