अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरतु मुनिहि मन भीतर भाए। सहित समाज राम पहिं आए।।
मूल पाठ
भरतु मुनिहि मन भीतर भाए। सहित समाज राम पहिं आए।।
प्रभु प्रनामु करि दीन्ह सुआसनु। बैठे सब सुनि मुनि अनुसासनु।।
स्रोत अभिलेख 2.257 · पुस्तक पृ. 558, 558
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनि वसिष्ठजीके अन्तरात्माको भरतजी बहुत अच्छे लगे और वे समाजसहित श्रीरामजीके पास आये। प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने प्रणामकर उत्तम आसन दिया। सब लोग मुनिकी आज्ञा सुनकर बैठ गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 558 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भरतु मुनिहि मन भीतर भाए। सहित समाज राम पहिं आए।।
English explanation
Bharata deeply endeared himself to the sage. The sage came to Rama with the assembled company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत | Bharata |
| मुनिहि | मुनि को | to the sage |
| मन | मन में | in the heart |
| भीतर | अंदर से | deep within |
| भाए | प्रिय लगे | were pleasing |
| सहित | के साथ | together with |
| समाज | समस्त साथ आए लोग | the assembled company |
| राम | श्रीराम | Rama |
| पहिं | के पास | to |
| आए | आए | came |
2 प्रभु प्रनामु करि दीन्ह सुआसनु। बैठे सब सुनि मुनि अनुसासनु।।
English explanation
Lord Rama bowed and provided suitable seats. Hearing the sage’s instruction, everyone sat down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| करि | करके | having made |
| दीन्ह | दिए | provided |
| सुआसनु | उत्तम आसन | suitable seats |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| सब | सभी | everyone |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि का | the sage’s |
| अनुसासनु | निर्देश | instruction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.257
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 558
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 558, 558
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।