अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बोले मुनिबरु बचन बिचारी। देस काल अवसर अनुहारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रेष्ठ मुनि देश, काल और अवसरके अनुसार विचार करके वचन बोले—हे सर्वज्ञ! हे सुजान! हे धर्म, नीति, गुण और ज्ञानके भण्डार राम! सुनिये—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 558 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बोले मुनिबरु बचन बिचारी। देस काल अवसर अनुहारी।।
सुनहु राम सरबग्य सुजाना। धरम नीति गुन ग्यान निधाना।।
स्रोत अभिलेख 2.257 · पुस्तक पृ. 558, 558
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बोले मुनिबरु बचन बिचारी। देस काल अवसर अनुहारी।।
English explanation
The eminent sage spoke thoughtfully, choosing words appropriate to the place, time, and occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | spoke |
| मुनिबरु | श्रेष्ठ मुनि वसिष्ठ | the eminent sage Vasishtha |
| बचन | वचन | words |
| बिचारी | विचार करके | after consideration |
| देस | स्थान | place |
| काल | समय | time |
| अवसर | अवसर | occasion |
| अनुहारी | के अनुरूप | in accordance with |
2 सुनहु राम सरबग्य सुजाना। धरम नीति गुन ग्यान निधाना।।
English explanation
Listen, Rama, all-knowing and wise, a treasury of righteousness, sound conduct, virtues, and knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनिए | listen |
| राम | हे राम | O Rama |
| सरबग्य | सब कुछ जानने वाले | all-knowing |
| सुजाना | विवेकवान | wise and discerning |
| धरम | धर्म | righteousness |
| नीति | नीति और उचित आचरण | sound policy and conduct |
| गुन | सद्गुण | virtues |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| निधाना | के भंडार | treasury of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.257
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 558
- सहायक विषय
- श्रीवसिष्ठजीका भाषण
- मुद्रित पृष्ठ
- 558, 558
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।