अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरतु न मोहि प्रिय राम समाना। सदा कहहु यहु सबु जगु जाना।।
मूल पाठ
भरतु न मोहि प्रिय राम समाना। सदा कहहु यहु सबु जगु जाना।।
करहु राम पर सहज सनेहू। केहिं अपराध आजु बनु देहू।।
स्रोत अभिलेख 2.49 · पुस्तक पृ. 384, 384
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वे कहती हैं—] तुम तो सदा कहा करती थीं कि श्रीरामचन्द्रके समान मुझको भरत भी प्यारे नहीं हैं; इस बातको सारा जगत् जानता है। श्रीरामचन्द्रजीपर तो तुम स्वाभाविक ही स्नेह करती रही हो। आज किस अपराधसे उन्हें वन देती हो?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 384 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भरतु न मोहि प्रिय राम समाना। सदा कहहु यहु सबु जगु जाना।।
English explanation
You always say, ‘Bharata is not as dear to me as Rama’; the whole world knows this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत, कैकेयी के पुत्र | Bharata, Kaikeyi’s son |
| न | नहीं | not |
| मोहि | मुझे | to me |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| राम | राम, दशरथ के पुत्र | Rama, Dasharatha’s son |
| समाना | के समान | as much as |
| सदा | सदा | always |
| कहहु | तुम कहती हो | you say |
| यहु | यह | this |
| सबु | सारा | whole |
| जगु | जगत | world |
| जाना | जानता है | knows |
2 करहु राम पर सहज सनेहू। केहिं अपराध आजु बनु देहू।।
English explanation
You naturally love Rama; for what offense are you sending him to the forest today?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहु | तुम करती हो | you have |
| राम | राम | Rama |
| पर | पर; के प्रति | toward |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| सनेहू | स्नेह | affection |
| केहिं | किस | for what |
| अपराध | अपराध के कारण | offense |
| आजु | आज | today |
| बनु | वन; वनवास | the forest; exile |
| देहू | तुम देती हो | you give |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 384
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 384, 384
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।