अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कबहुँ न कियहु सवति आरेसू। प्रीति प्रतीति जान सबु देसू।।
मूल पाठ
कबहुँ न कियहु सवति आरेसू। प्रीति प्रतीति जान सबु देसू।।
कौसल्याँ अब काह बिगारा। तुम्ह जेहि लागि बज्र पुर पारा।।
स्रोत अभिलेख 2.49 · पुस्तक पृ. 384, 384
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुमने कभी सौतियाडाह नहीं किया। सारा देश तुम्हारे प्रेम और विश्वासको जानता है। अब कौसल्याने तुम्हारा कौन-सा बिगाड़ कर दिया, जिसके कारण तुमने सारे नगरपर वज्र गिरा दिया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 384 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कबहुँ न कियहु सवति आरेसू। प्रीति प्रतीति जान सबु देसू।।
English explanation
You have never shown jealousy toward your co-wife; the whole land knows your love and trust.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| कियहु | तुमने किया | you showed |
| सवति | सौत के प्रति | toward your co-wife |
| आरेसू | ईर्ष्या; द्वेष | jealousy; resentment |
| प्रीति | प्रेम | love |
| प्रतीति | विश्वास | trust |
| जान | जानता है | knows |
| सबु | सारा | whole |
| देसू | देश | land |
2 कौसल्याँ अब काह बिगारा। तुम्ह जेहि लागि बज्र पुर पारा।।
English explanation
What harm has Kausalya done you now, that you have brought a thunderbolt down upon the city?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्याँ | कौसल्या ने | Kausalya, Rama’s mother |
| अब | अब | now |
| काह | क्या | what |
| बिगारा | बिगाड़ा; हानि की | harm has done |
| तुम्ह | तुमने | you |
| जेहि | जिस | which |
| लागि | के कारण | because of |
| बज्र | वज्र; भीषण आघात | thunderbolt; devastating blow |
| पुर | नगर पर | upon the city |
| पारा | गिरा दिया | brought down |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 384
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 384, 384
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।