अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिप्रबधू कुलमान्य जठेरी। जे प्रिय परम कैकेई केरी।।
मूल पाठ
बिप्रबधू कुलमान्य जठेरी। जे प्रिय परम कैकेई केरी।।
लगीं देन सिख सीलु सराही। बचन बानसम लागहिं ताही।।
स्रोत अभिलेख 2.49 · पुस्तक पृ. 384, 384
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्राह्मणोंकी स्त्रियाँ, कुलकी माननीय बड़ी-बूढ़ी और जो कैकेयीकी परम प्रिय थीं, वे उसके शीलकी सराहना करके उसे सीख देने लगीं। पर उसको उनके वचन बाणके समान लगते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 384 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिप्रबधू कुलमान्य जठेरी। जे प्रिय परम कैकेई केरी।।
English explanation
The Brahmin wives, respected in the family and senior in age, who were very dear to Kaikeyi—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रबधू | ब्राह्मणों की पत्नियाँ | Brahmin wives |
| कुलमान्य | कुल में सम्मानित | respected in the family |
| जठेरी | उम्र में बड़ी | senior in age |
| जे | जो | who |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| परम | अत्यंत | very |
| कैकेई | रानी कैकेयी | Queen Kaikeyi |
| केरी | की; उन्हें | to her |
2 लगीं देन सिख सीलु सराही। बचन बानसम लागहिं ताही।।
English explanation
They began advising her while praising her character; their words struck her like arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लगीं | लगीं | began |
| देन | देने | to give |
| सिख | सीख; उपदेश | advice |
| सीलु | शील; सदाचरण | good character |
| सराही | प्रशंसा करके | having praised |
| बचन | वचन | words |
| बानसम | बाणों के समान | like arrows |
| लागहिं | लगते हैं | strike |
| ताही | उसे, कैकेयी को | her, Kaikeyi |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 384
- सहायक विषय
- श्रीराम-दशरथ-संवाद, अवध-वासियोंका विषाद, कैकेयीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 384, 384
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।