अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भरतहि देखि मातु उठि धाई। मुरुछित अवनि परी झइँ आई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरतको देखते ही माता कौसल्याजी उठ दौड़ीं। पर चक्कर आ जानेसे मूॢच्छत होकर पृथ्वीपर गिर पड़ीं। यह देखते ही भरतजी बड़े व्याकुल हो गये और शरीरकी सुध भुलाकर चरणोंमें गिर पड़े॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 479 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भरतहि देखि मातु उठि धाई। मुरुछित अवनि परी झइँ आई।।
देखत भरतु बिकल भए भारी। परे चरन तन दसा बिसारी।।
स्रोत अभिलेख 2.164 · पुस्तक पृ. 479, 480
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भरतहि देखि मातु उठि धाई। मुरुछित अवनि परी झइँ आई।।
English explanation
Seeing Bharata, Mother Kaushalya rose and rushed toward him; as she approached, she suddenly fell unconscious to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतहि | भरत को | Bharata, the one seen |
| देखि | देखकर | having seen |
| मातु | माता कौसल्या | Mother Kaushalya |
| उठि | उठकर | having risen |
| धाई | दौड़ीं | rushed |
| मुरुछित | मूर्च्छित होकर | unconscious |
| अवनि | धरती पर | to the ground |
| परी | गिर पड़ीं | fell |
| झइँ | अचानक, धम्म से | suddenly, with a thud |
| आई | आकर | having approached |
2 देखत भरतु बिकल भए भारी। परे चरन तन दसा बिसारी।।
English explanation
Seeing this, Bharata became deeply distressed and fell at his mother's feet, forgetting his own bodily condition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखत | देखते ही | on seeing this |
| भरतु | भरत | Bharata |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| भए | हो गए | became |
| भारी | अत्यंत | extremely |
| परे | गिर पड़े | fell |
| चरन | चरणों में | at her feet |
| तन | अपने शरीर की | of his own body |
| दसा | दशा | condition |
| बिसारी | भूलकर | having forgotten |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.164
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 479
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 479, 480
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।