अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भट जम नियम सैल रजधानी। सांति सुमति सुचि सुंदर रानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह) तथा नियम (शौच, सन्तोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वरप्रणिधान) योद्धा हैं। पर्वत राजधानी है, शान्ति तथा सुबुद्धि दो सुन्दर पवित्र रानियाँ हैं। वह श्रेष्ठ राजा राज्यके सब अङ्गोंसे पूर्ण है और श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंके आश्रित रहनेसे उसके चित्तमें चाव (आनन्द या उत्साह) है॥ ४॥ [स्वामी, अमात्य, सुहृद्, कोष, राष्ट्र, दुर्ग और सेना—राज्यके ये सात अङ्ग हैं।]
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 539 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भट जम नियम सैल रजधानी। सांति सुमति सुचि सुंदर रानी।।
सकल अंग संपन्न सुराऊ। राम चरन आश्रित चित चाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.235 · पुस्तक पृ. 539, 540
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भट जम नियम सैल रजधानी। सांति सुमति सुचि सुंदर रानी।।
English explanation
Moral restraints and observances are the warriors, the mountain is the capital, and peace and sound understanding are pure, beautiful queens.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भट | योद्धा | warriors |
| जम | यम, नैतिक संयम | moral restraints |
| नियम | नियम, अनुशासित आचरण | disciplined observances |
| सैल | पर्वत | mountain |
| रजधानी | राजधानी | capital |
| सांति | शांति | peace |
| सुमति | सद्बुद्धि | sound understanding |
| सुचि | पवित्र | pure |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
| रानी | रानियाँ | queens |
2 सकल अंग संपन्न सुराऊ। राम चरन आश्रित चित चाऊ।।
English explanation
This good king possesses every constituent of a kingdom; sheltered at Rama’s feet, his heart is joyful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सकल | सभी | all |
| अंग | राज्य के अंगों से | constituents of the kingdom |
| संपन्न | संपन्न | endowed |
| सुराऊ | उत्तम राजा | good king |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| आश्रित | आश्रय लिए हुए | taking refuge |
| चित | चित्त में | in the heart |
| चाऊ | आनंद और उत्साह | joy and gladness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.235
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 539
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 539, 540
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।