अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भएँ ग्यानु बरु मिटै न मोहू। तुम्ह रामहि प्रतिकूल न होहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऔर ज्ञान हो जानेपर भी चाहे मोह न मिटे; पर तुम श्रीरामचन्द्रके प्रतिकूल कभी नहीं हो सकते। इसमें तुम्हारी सम्मति है, जगत्में जो कोई ऐसा कहते हैं वे स्वप्रमें भी सुख और शुभ गति नहीं पावेंगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 483 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भएँ ग्यानु बरु मिटै न मोहू। तुम्ह रामहि प्रतिकूल न होहू।।
मत तुम्हार यहु जो जग कहहीं। सो सपनेहुँ सुख सुगति न लहहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.169 · पुस्तक पृ. 483, 484
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भएँ ग्यानु बरु मिटै न मोहू। तुम्ह रामहि प्रतिकूल न होहू।।
English explanation
Even if delusion were not dispelled by knowledge, you could never become opposed to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भएँ | होने पर | upon arising |
| ग्यानु | ज्ञान | knowledge |
| बरु | भले ही | even if |
| मिटै | मिटे | be dispelled |
| न | नहीं | not |
| मोहू | मोह; अज्ञानजनित आसक्ति | delusion; attachment |
| तुम्ह | तुम | you |
| रामहि | राम के प्रति | toward Rama |
| प्रतिकूल | विरोधी; विमुख | opposed; hostile |
| न | नहीं | never |
| होहू | हो सकते | could become |
2 मत तुम्हार यहु जो जग कहहीं। सो सपनेहुँ सुख सुगति न लहहीं।।
English explanation
Those in the world who call this your scheme will not attain happiness or a blessed destiny even in a dream.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मत | योजना; अभिप्राय | scheme; intention |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
| यहु | यह | this |
| जो | जो लोग | those who |
| जग | संसार में | in the world |
| कहहीं | कहते हैं | say; call |
| सो | वे | they |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| सुख | सुख | happiness |
| सुगति | शुभ गति | a blessed destiny |
| न | नहीं | not |
| लहहीं | पाएँगे | will attain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.169
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 483
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 483, 484
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।