अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि मातु भरतु हियँ लाए। थन पय स्त्रवहिं नयन जल छाए।।
मूल पाठ
अस कहि मातु भरतु हियँ लाए। थन पय स्त्रवहिं नयन जल छाए।।
करत बिलाप बहुत यहि भाँती। बैठेहिं बीति गइ सब राती।।
स्रोत अभिलेख 2.169 · पुस्तक पृ. 483, 484
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा कहकर माता कौसल्याने भरतजीको हृदयसे लगा लिया। उनके स्तनोंसे दूध बहने लगा और नेत्रोंमें [प्रेमाश्रुओंका] जल छा गया। इस प्रकार बहुत विलाप करते हुए सारी रात बैठे-ही- बैठे बीत गयी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 484 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस कहि मातु भरतु हियँ लाए। थन पय स्त्रवहिं नयन जल छाए।।
English explanation
Saying this, mother Kausalya embraced Bharata. Milk flowed from her breasts, and tears filled her eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| मातु | माता कौसल्या | mother Kausalya |
| भरतु | भरत को | Bharata, Rama's brother |
| हियँ | हृदय से | to her heart |
| लाए | लगा लिया | held close; embraced |
| थन | स्तनों से | from her breasts |
| पय | दूध | milk |
| स्त्रवहिं | बहने लगा | flowed |
| नयन | आँखों में | in her eyes |
| जल | आँसू | tears |
| छाए | भर आए | welled up |
2 करत बिलाप बहुत यहि भाँती। बैठेहिं बीति गइ सब राती।।
English explanation
As they sat lamenting greatly in this way, the entire night passed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | while doing |
| बिलाप | विलाप | lamentation |
| बहुत | बहुत | much; greatly |
| यहि | इस | this |
| भाँती | प्रकार | way |
| बैठेहिं | बैठे-बैठे ही | while still sitting |
| बीति | बीत | passed |
| गइ | गई | away |
| सब | सारी | the whole |
| राती | रात | night |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.169
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 484
- सहायक विषय
- भरत-कौसल्या-संवाद और दशरथजीकी अन्त्येष्टि क्रिया
- मुद्रित पृष्ठ
- 483, 484
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