अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भइ दिनकर कुल बिटप कुठारी। कुमति कीन्ह सब बिस्व दुखारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह सूर्यकुलरूपी वृक्षके लिये कुल्हाड़ी हो गयी। उस कुबुद्धिने सम्पूर्ण विश्वको दु:खी कर दिया। श्रीराम-सीताको जमीनपर सोते हुए देखकर निषादको बड़ा दु:ख हुआ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 419 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भइ दिनकर कुल बिटप कुठारी। कुमति कीन्ह सब बिस्व दुखारी।।
भयउ बिषादु निषादहि भारी। राम सीय महि सयन निहारी।।
स्रोत अभिलेख 2.92 · पुस्तक पृ. 419, 420
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भइ दिनकर कुल बिटप कुठारी। कुमति कीन्ह सब बिस्व दुखारी।।
English explanation
She became an axe to the tree of the solar dynasty; her misguided mind made the whole world sorrowful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भइ | बन गई | became |
| दिनकर | सूर्य | the sun |
| कुल | वंश | dynasty |
| बिटप | वृक्ष | tree |
| कुठारी | कुल्हाड़ी | axe |
| कुमति | बुरी बुद्धि | misguided mind |
| कीन्ह | कर दिया | made |
| सब | सारा | the whole |
| बिस्व | संसार | world |
| दुखारी | दुखी | sorrowful |
2 भयउ बिषादु निषादहि भारी। राम सीय महि सयन निहारी।।
English explanation
Seeing Rama and Sita sleeping on the ground, the Nishada chief felt profound sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हुआ | arose |
| बिषादु | विषाद | sorrow |
| निषादहि | निषादराज गुह को | to Guha, the Nishada chief |
| भारी | बहुत गहरा | profound |
| राम | राम | Rama, the exiled prince |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| महि | धरती पर | on the ground |
| सयन | शयन | sleeping |
| निहारी | देखकर | having seen |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.92
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 419
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 419, 420
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।