अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिहसि मागु मनभावति बाता। भूषन सजहि मनोहर गाता।।
मूल पाठ
बिहसि मागु मनभावति बाता। भूषन सजहि मनोहर गाता।।
घरी कुघरी समुझि जियँ देखू। बेगि प्रिया परिहरहि कुबेषू।।
स्रोत अभिलेख 2.26 · पुस्तक पृ. 365, 365
भावार्थ
मूल पाठ के बादतू हँसकर (प्रसन्नतापूर्वक) अपनी मनचाही बात माँग ले और अपने मनोहर अंगोंको आभूषणोंसे सजा। मौका-बेमौका तो मनमें विचारकर देख। हे प्रिये! जल्दी इस बुरे वेषको त्याग दे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 365 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिहसि मागु मनभावति बाता। भूषन सजहि मनोहर गाता।।
English explanation
Smile and ask for whatever pleases your heart; adorn your lovely body with ornaments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिहसि | हँसकर; मुस्कराकर | smiling |
| मागु | माँगो | ask for |
| मनभावति | मन को भाने वाली | pleasing to your heart |
| बाता | बात; इच्छा | request; desired thing |
| भूषन | आभूषणों से | with ornaments |
| सजहि | सजाओ | adorn |
| मनोहर | सुंदर | lovely |
| गाता | शरीर | body |
2 घरी कुघरी समुझि जियँ देखू। बेगि प्रिया परिहरहि कुबेषू।।
English explanation
Consider in your heart whether the moment is auspicious or ill-timed. Beloved, quickly discard this unbecoming attire.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| घरी | उचित समय; शुभ घड़ी | a fitting or auspicious moment |
| कुघरी | अनुचित समय; अशुभ घड़ी | an ill-timed or inauspicious moment |
| समुझि | समझकर; विचारकर | considering |
| जियँ | मन में | in your heart |
| देखू | देखो; परखो | examine; reflect |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| प्रिया | हे प्रिये | O beloved |
| परिहरहि | त्याग दो | discard |
| कुबेषू | अनुचित; अशोभन वेश | unbecoming attire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.26
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 365
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 365, 365
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।