अयोध्याकाण्ड · दोहा 26 · दोहा/सोरठा
यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि बिहसि उठी मतिमंद।
यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि बिहसि उठी मतिमंद।
भूषन सजति बिलोकि मृगु मनहुँ किरातिनि फंद।।26।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.26 · पुस्तक पृ. 365, 365
भावार्थ और शब्दार्थ
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1यह सुनि मन गुनि सपथ बड़ि बिहसि उठी मतिमंद।
यह सुनकर और मन में शपथ को बड़ी समझकर, मंदबुद्धि कैकेयी हँसकर उठी।
English explanation
Hearing this and judging the oath weighty in her mind, the foolish Kaikeyi smiled and rose.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह बात | this |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मन | मन में | in her mind |
| गुनि | विचारकर; मानकर | considering; judging |
| सपथ | शपथ को | the oath |
| बड़ि | बड़ी; भारी महत्त्व की | weighty; momentous |
| बिहसि | हँसकर | smiling |
| उठी | उठी | rose |
| मतिमंद | मंदबुद्धि कैकेयी | the foolish Kaikeyi |
2 भूषन सजति बिलोकि मृगु मनहुँ किरातिनि फंद।।26।।
वह आभूषण सजाने लगी, मानो हिरण देखकर कोई शिकारिन अपना फंदा सजा रही हो।
English explanation
She began arranging her ornaments, like a huntress who, spotting a deer, prepares her snare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| सजति | सजाती है | arranges; puts on |
| बिलोकि | देखकर | having spotted |
| मृगु | हिरण | deer |
| मनहुँ | मानो | as though |
| किरातिनि | शिकारिन | huntress |
| फंद | फंदा; पाश | snare; trap |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 26
- स्रोत अभिलेख
- 2.26
- सहायक विषय
- दशरथ-कैकेयी-संवाद और दशरथ-शोक, सुमन्त्रका महलमें जाना और वहाँसे लौटकर श्रीरामजीको महलमें भेजना
- मुद्रित पृष्ठ
- 365, 365
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