अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।।
मूल पाठ
बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।।
केवट बुध बिद्या बड़ि नावा। सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा।।
स्रोत अभिलेख 2.276 · पुस्तक पृ. 573, 574
भावार्थ
मूल पाठ के बादभयानक विषाद (शोक) ही उस नदीकी तेज धारा है। भय और भ्रम (मोह) ही उसके असंख्य भँवर और चक्र हैं। विद्वान् मल्लाह हैं, विद्या ही बड़ी नाव है। परन्तु वे उसे खे नहीं सकते हैं, (उस विद्याका उपयोग नहीं कर सकते हैं), किसीको उसकी अटकल ही नहीं आती है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 573 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिषम बिषाद तोरावति धारा। भय भ्रम भवँर अबर्त अपारा।।
English explanation
The current of terrible anguish breaks the banks; the whirlpools and eddies of fear and confusion are boundless.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषम | भीषण | terrible |
| बिषाद | विषाद; गहरा दुःख | anguish; deep sorrow |
| तोरावति | तोड़ती जाती है | keeps breaking away |
| धारा | जलधारा | current |
| भय | डर | fear |
| भ्रम | भ्रम; उलझन | confusion |
| भवँर | भँवर | whirlpools |
| अबर्त | जल के चक्कर | eddies |
| अपारा | अपार; असीम | boundless |
2 केवट बुध बिद्या बड़ि नावा। सकहिं न खेइ ऐक नहिं आवा।।
English explanation
The wise are the boatmen and learning is the large boat, yet they cannot row it; no one can devise a way to navigate it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केवट | नाविक | boatmen |
| बुध | बुद्धिमान लोग | the wise |
| बिद्या | विद्या; ज्ञान | learning |
| बड़ि | बड़ी | large |
| नावा | नाव | boat |
| सकहिं | सकते हैं | are able |
| न | नहीं | not |
| खेइ | नाव खेना; चलाना | to row; navigate |
| ऐक | युक्ति; उपाय | a workable method |
| नहिं | नहीं | not |
| आवा | सूझा; समझ में आया | came to mind; was understood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.276
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 573
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 573, 574
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।