अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिषई जीव पाइ प्रभुताई। मूढ़ मोह बस होहिं जनाई।।
मूल पाठ
बिषई जीव पाइ प्रभुताई। मूढ़ मोह बस होहिं जनाई।।
भरतु नीति रत साधु सुजाना। प्रभु पद प्रेम सकल जगु जाना।।
स्रोत अभिलेख 2.228 · पुस्तक पृ. 533, 534
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु मूढ़ विषयी जीव प्रभुता पाकर मोहवश अपने असली स्वरूपको प्रकट कर देते हैं। भरत नीतिपरायण, साधु और चतुर हैं तथा प्रभु (आप) के चरणोंमें उनका प्रेम है, इस बातको सारा जगत् जानता है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 533 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिषई जीव पाइ प्रभुताई। मूढ़ मोह बस होहिं जनाई।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Worldly beings, on gaining power, become foolish under delusion’s sway—this is well known.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषई | विषय-भोगों में आसक्त | attached to sensual pleasures |
| जीव | जीव; मनुष्य | beings; people |
| पाइ | पाकर | having obtained |
| प्रभुताई | प्रभुता; सत्ता | power; authority |
| मूढ़ | विवेकहीन | foolish; undiscerning |
| मोह | मोह के | of delusion |
| बस | वश में | under the sway |
| होहिं | हो जाते हैं | become |
| जनाई | यह जाना हुआ है | this is known |
2 भरतु नीति रत साधु सुजाना। प्रभु पद प्रेम सकल जगु जाना।।
English explanation
Bharata is devoted to right conduct, virtuous and discerning; the whole world knows his love for Lord Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरतु | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| नीति | नीति; उचित आचरण | principles of right conduct |
| रत | तत्पर; अनुरक्त | devoted to |
| साधु | सज्जन | virtuous |
| सुजाना | विवेकशील; समझदार | discerning; wise |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| प्रेम | प्रेम | love |
| सकल | सारा | the whole |
| जगु | जगत | world |
| जाना | जानता है | knows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.228
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 533
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 533, 534
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।