अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपर इस निर्मल वंशमें यही एक अनुचित बात हो रही है कि और सब भाइयोंको छोड़कर राज्याभिषेक एक बड़ेका ही (मेरा ही) होता है। [तुलसीदासजी कहते हैं कि] प्रभु श्रीरामचन्द्रजीका यह सुन्दर प्रेमपूर्ण पछतावा भक्तोंके मनकी कुटिलताको हरण करे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 352 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू।।
प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।।
स्रोत अभिलेख 2.1 · पुस्तक पृ. 351, 352
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिमल बंस यहु अनुचित एकू। बंधु बिहाइ बड़ेहि अभिषेकू।।
English explanation
In this unstained lineage, this alone is improper: the eldest alone is consecrated, leaving the other brothers aside.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिमल | निर्मल; निष्कलंक | unstained; noble |
| बंस | वंश में | in the lineage |
| यहु | यह | this |
| अनुचित | अनुचित बात | improper practice |
| एकू | एक ही | the only one |
| बंधु | भाइयों को | the brothers |
| बिहाइ | छोड़कर | leaving aside |
| बड़ेहि | केवल बड़े भाई का | of the eldest alone |
| अभिषेकू | राज्याभिषेक | royal consecration |
2 प्रभु सप्रेम पछितानि सुहाई। हरउ भगत मन कै कुटिलाई।।
English explanation
May the Lord’s beautiful, loving regret remove the crookedness in devotees’ hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | Lord Rama’s |
| सप्रेम | प्रेमभरा | loving; filled with love |
| पछितानि | खेद; पछतावा | regret |
| सुहाई | सुंदर; मनोहर | beautiful; endearing |
| हरउ | दूर करे | may it remove |
| भगत | भक्तों के | devotees’ |
| मन | मन | hearts |
| कै | की | of |
| कुटिलाई | कुटिलता | crookedness; guile |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 352
- सहायक विषय
- रामराज्याभिषेककी तैयारी, देवताओंकी व्याकुलता तथा सरस्वतीजीसे उनकी प्रार्थना
- मुद्रित पृष्ठ
- 351, 352
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