अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिबिध कथा कहि कहि मृदु बानी। रथ बैठारेउ बरबस आनी।।
मूल पाठ
बिबिध कथा कहि कहि मृदु बानी। रथ बैठारेउ बरबस आनी।।
सोक सिथिल रथ सकइ न हाँकी। रघुबर बिरह पीर उर बाँकी।।
स्रोत अभिलेख 2.143 · पुस्तक पृ. 462, 463
भावार्थ
मूल पाठ के बादकोमल वाणीसे भाँति-भाँतिकी कथाएँ कहकर निषादने जबर्दस्ती लाकर सुमन्त्रको रथपर बैठाया। परन्तु शोकके मारे वे इतने शिथिल हो गये कि रथको हाँक नहीं सकते। उनके हृदयमें श्रीरामचन्द्रजीके विरहकी बड़ी तीव्र वेदना है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 462 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिबिध कथा कहि कहि मृदु बानी। रथ बैठारेउ बरबस आनी।।
English explanation
Speaking various words of consolation in a gentle voice, the Nishada king brought Sumantra over and firmly seated him in the chariot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबिध | विविध | various |
| कथा | बातें | accounts and words of counsel |
| कहि | कहकर | speaking |
| कहि | बार-बार कहकर | repeatedly speaking |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बानी | वाणी में | in a voice |
| रथ | रथ में | in the chariot |
| बैठारेउ | बैठा दिया | seated him |
| बरबस | बलपूर्वक | forcibly |
| आनी | लाकर | having brought him |
2 सोक सिथिल रथ सकइ न हाँकी। रघुबर बिरह पीर उर बाँकी।।
English explanation
Weakened by grief, Sumantra cannot drive the chariot; the piercing pain of separation from Rama fills his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक से | by grief |
| सिथिल | शिथिल | weakened |
| रथ | रथ | the chariot |
| सकइ | सकते हैं | can |
| न | नहीं | not |
| हाँकी | हाँकना | drive |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम के | from Rama, foremost of Raghu’s line |
| बिरह | विरह की | of separation |
| पीर | पीड़ा | pain |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बाँकी | तीखी और प्रबल | piercing and intense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.143
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 462
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 462, 463
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।