अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चरफराहिं मग चलहिं न घोरे। बन मृग मनहुँ आनि रथ जोरे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दघोड़े तडफ़ड़ाते हैं और [ठीक] रास्तेपर नहीं चलते। मानो जंगली पशु लाकर रथमें जोत दिये गये हों। वे श्रीरामचन्द्रजीके वियोगी घोड़े कभी ठोकर खाकर गिर पड़ते हैं, कभी घूमकर पीछेकी ओर देखने लगते हैं। वे तीक्ष्ण दु:खसे व्याकुल हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 462 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चरफराहिं मग चलहिं न घोरे। बन मृग मनहुँ आनि रथ जोरे।।
अढ़ुकि परहिं फिरि हेरहिं पीछें। राम बियोगि बिकल दुख तीछें।।
स्रोत अभिलेख 2.143 · पुस्तक पृ. 462, 463
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चरफराहिं मग चलहिं न घोरे। बन मृग मनहुँ आनि रथ जोरे।।
English explanation
The horses fidget and will not proceed along the road, as though wild deer had been brought and harnessed to the chariot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चरफराहिं | छटपटाते हैं | fidget restlessly |
| मग | मार्ग पर | along the road |
| चलहिं | चलते हैं | move |
| न | नहीं | not |
| घोरे | घोड़े | the horses |
| बन | वन के | of the forest |
| मृग | हिरन | deer |
| मनहुँ | मानो | as though |
| आनि | लाकर | having brought |
| रथ | रथ में | to the chariot |
| जोरे | जोत दिए हों | had been harnessed |
2 अढ़ुकि परहिं फिरि हेरहिं पीछें। राम बियोगि बिकल दुख तीछें।।
English explanation
The horses stumble and fall, turning to look behind; separated from Rama, they are distraught with sharp sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अढ़ुकि | ठोकर खाकर | stumbling |
| परहिं | गिरते हैं | fall |
| फिरि | मुड़कर | turning back |
| हेरहिं | देखते हैं | look |
| पीछें | पीछे | behind |
| राम | राम से | from Rama |
| बियोगि | वियोग में | in separation |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| दुख | दुःख से | with sorrow |
| तीछें | तीखे | sharp |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.143
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 462
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 462, 463
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।