अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही।।
मूल पाठ
जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही।।
बाजि बिरह गति कहि किमि जाती। बिनु मनि फनिक बिकल जेहि भाँती।।
स्रोत अभिलेख 2.143 · पुस्तक पृ. 462, 463
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो कोई राम, लक्ष्मण या जानकीका नाम ले लेता है, घोड़े हिकर-हिकरकर उसकी ओर प्यारसे देखने लगते हैं। घोड़ोंकी विरहदशा कैसे कही जा सकती है? वे ऐसे व्याकुल हैं जैसे मणिके बिना साँप व्याकुल होता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 463 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जो कह रामु लखनु बैदेही। हिंकरि हिंकरि हित हेरहिं तेही।।
English explanation
Whenever someone utters the names of Rama, Lakshmana, and Sita, the horses neigh repeatedly and look at that person affectionately.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो कोई | whoever |
| कह | कहता है | says |
| रामु | राम का नाम | Rama’s name |
| लखनु | लक्ष्मण का नाम | Lakshmana’s name |
| बैदेही | विदेहकुमारी सीता का नाम | the name of Sita, princess of Videha |
| हिंकरि | हिनहिनाकर | neighing |
| हिंकरि | बार-बार हिनहिनाकर | neighing repeatedly |
| हित | स्नेह से | affectionately |
| हेरहिं | देखते हैं | look at |
| तेही | उसी व्यक्ति को | that very person |
2 बाजि बिरह गति कहि किमि जाती। बिनु मनि फनिक बिकल जेहि भाँती।।
English explanation
How can the horses’ state of anguish in separation be described? They are distraught like a serpent deprived of its jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाजि | घोड़ों की | of the horses |
| बिरह | विरह की | in separation |
| गति | दशा | condition |
| कहि | कही | described |
| किमि | कैसे | how |
| जाती | जा सकती है | can be |
| बिनु | बिना | without |
| मनि | मणि के | its jewel |
| फनिक | सर्प | a serpent |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| जेहि | जिस | in which |
| भाँती | प्रकार | manner |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.143
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 463
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 462, 463
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।