अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धरि धीरज तब कहइ निषादू। अब सुमंत्र परिहरहु बिषादू।।
मूल पाठ
धरि धीरज तब कहइ निषादू। अब सुमंत्र परिहरहु बिषादू।।
तुम्ह पंडित परमारथ ग्याता। धरहु धीर लखि बिमुख बिधाता
स्रोत अभिलेख 2.143 · पुस्तक पृ. 462, 463
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब धीरज धरकर निषादराज कहने लगा—हे सुमन्त्रजी! अब विषादको छोडिय़े। आप पण्डित और परमार्थके जाननेवाले हैं। विधाताको प्रतिकूल जानकर धैर्य धारण कीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 462 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धरि धीरज तब कहइ निषादू। अब सुमंत्र परिहरहु बिषादू।।
English explanation
AI-generated draft interpretation: Gathering his composure, the Nishada king said, ‘Sumantra, now put aside your grief.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरि | धारण करके | having gathered |
| धीरज | धैर्य | composure |
| तब | तब | then |
| कहइ | कहता है | says |
| निषादू | निषादराज गुह | Guha, the Nishada king |
| अब | अब | now |
| सुमंत्र | हे सुमंत्र, राजमंत्री और सारथी | O Sumantra, the royal minister and charioteer |
| परिहरहु | छोड़िए | put aside |
| बिषादू | शोक | grief |
2 तुम्ह पंडित परमारथ ग्याता। धरहु धीर लखि बिमुख बिधाता
English explanation
You are learned and know the highest truth; remain steadfast even when Providence appears adverse.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| पंडित | विद्वान | learned |
| परमारथ | परम सत्य का | of the highest truth |
| ग्याता | जानने वाले | a knower |
| धरहु | धारण कीजिए | maintain |
| धीर | धैर्य | fortitude |
| लखि | देखकर | seeing |
| बिमुख | प्रतिकूल | adverse |
| बिधाता | भाग्य-विधाता को | Providence |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.143
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 462
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 462, 463
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।