अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती। आरति प्रीति न सो कहि जाती।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दराजाने जिस तरह (जिस दीनता और प्रेमसे) विनती की है, वह दीनता और प्रेम कहा नहीं जा सकता। कृपानिधान श्रीरामचन्द्रजीने पिताका सन्देश सुनकर सीताजीको करोड़ों (अनेकों) प्रकारसे सीख दी॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 423 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती। आरति प्रीति न सो कहि जाती।।
पितु सँदेसु सुनि कृपानिधाना। सियहि दीन्ह सिख कोटि बिधाना।।
स्रोत अभिलेख 2.97 · पुस्तक पृ. 423, 424
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिनती भूप कीन्ह जेहि भाँती। आरति प्रीति न सो कहि जाती।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: The king’s manner of pleading, with such anguish and love, cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनती | विनती | plea |
| भूप | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| कीन्ह | की | made |
| जेहि | जिस | in which |
| भाँती | प्रकार | manner |
| आरति | व्याकुलता | anguish |
| प्रीति | प्रेम | love |
| न | नहीं | not |
| सो | वह | that |
| कहि | कही | expressed |
| जाती | जा सकती | can be |
2 पितु सँदेसु सुनि कृपानिधाना। सियहि दीन्ह सिख कोटि बिधाना।।
English explanation
Hearing his father’s message, Rama, the treasure of compassion, counselled Sita in countless ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पितु | पिता का | his father’s |
| सँदेसु | संदेश | message |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार राम ने | Rama, the treasure of compassion |
| सियहि | सीता को | to Sita |
| दीन्ह | दी | gave |
| सिख | सीख; समझाइश | counsel |
| कोटि | असंख्य | countless |
| बिधाना | प्रकारों से | in ways |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 423
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 423, 424
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।