अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सासु ससुर गुर प्रिय परिवारू। फिरतु त सब कर मिटै खभारू।।
मूल पाठ
सासु ससुर गुर प्रिय परिवारू। फिरतु त सब कर मिटै खभारू।।
सुनि पति बचन कहति बैदेही। सुनहु प्रानपति परम सनेही।।
स्रोत अभिलेख 2.97 · पुस्तक पृ. 423, 424
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उन्होंने कहा—] जो तुम घर लौट जाओ, तो सास, ससुर, गुरु, प्रियजन एवं कुटुम्बी सबकी चिन्ता मिट जाय। पतिके वचन सुनकर जानकीजी कहती हैं—हे प्राणपति! हे परम स्नेही! सुनिये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 423 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सासु ससुर गुर प्रिय परिवारू। फिरतु त सब कर मिटै खभारू।।
English explanation
If you return, the distress of your mother-in-law, father-in-law, preceptor, and dear family will all be relieved.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सासु | सास | mother-in-law |
| ससुर | ससुर | father-in-law |
| गुर | गुरु | preceptor |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| परिवारू | परिवार | family |
| फिरतु | तुम्हारे लौटने पर | if you return |
| त | तो | then |
| सब | सबका | everyone |
| कर | का | of |
| मिटै | मिट जाएगा | will disappear |
| खभारू | चिंता; क्लेश | distress; worry |
2 सुनि पति बचन कहति बैदेही। सुनहु प्रानपति परम सनेही।।
English explanation
Hearing her husband’s words, Sita says: Listen, lord of my life, most loving one.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| पति | पति के | her husband’s |
| बचन | वचन | words |
| कहति | कहती हैं | says |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
| सुनहु | सुनिए | please listen |
| प्रानपति | हे प्राणों के स्वामी | O lord of my life |
| परम | अत्यंत | supremely |
| सनेही | स्नेह करने वाले | loving one |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 423
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 423, 424
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।