अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु करुनामय परम बिबेकी। तनु तजि रहति छाँह किमि छेंकी।।
मूल पाठ
प्रभु करुनामय परम बिबेकी। तनु तजि रहति छाँह किमि छेंकी।।
प्रभा जाइ कहँ भानु बिहाई। कहँ चंद्रिका चंदु तजि जाई।।
स्रोत अभिलेख 2.97 · पुस्तक पृ. 423, 424
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रभो! आप करुणामय और परम ज्ञानी हैं। [कृपा करके विचार तो कीजिये] शरीरको छोड़कर छाया अलग कैसे रोकी रह सकती है? सूर्यकी प्रभा सूर्यको छोड़कर कहाँ जा सकती है? और चाँदनी चन्द्रमाको त्यागकर कहाँ जा सकती है?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 424 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु करुनामय परम बिबेकी। तनु तजि रहति छाँह किमि छेंकी।।
English explanation
Lord, you are compassionate and supremely discerning; how can a shadow be held apart from the body it belongs to?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे स्वामी | O lord |
| करुनामय | करुणा से पूर्ण | full of compassion |
| परम | अत्यंत | supremely |
| बिबेकी | विवेकशील | discerning |
| तनु | शरीर को | the body |
| तजि | छोड़कर | leaving |
| रहति | रह सकती है | can remain |
| छाँह | छाया | shadow |
| किमि | कैसे | how |
| छेंकी | अलग रोककर रखी हुई | held apart |
2 प्रभा जाइ कहँ भानु बिहाई। कहँ चंद्रिका चंदु तजि जाई।।
English explanation
Where can sunlight go, leaving the sun? Where can moonlight go, leaving the moon?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभा | सूर्य की प्रभा | sunlight |
| जाइ | जा सकती है | can go |
| कहँ | कहाँ | where |
| भानु | सूर्य को | the sun |
| बिहाई | छोड़कर | leaving |
| कहँ | कहाँ | where |
| चंद्रिका | चाँदनी | moonlight |
| चंदु | चंद्रमा को | the moon |
| तजि | छोड़कर | leaving |
| जाई | जा सकती है | can go |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 424
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 423, 424
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।