अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पतिहि प्रेममय बिनय सुनाई। कहति सचिव सन गिरा सुहाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकार पतिको प्रेममयी विनती सुनाकर सीताजी मन्त्रीसे सुहावनी वाणी कहने लगीं—आप मेरे पिताजी और ससुरजीके समान मेरा हित करनेवाले हैं। आपको मैं बदलेमें उत्तर देती हूँ, यह बहुत ही अनुचित है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 424 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पतिहि प्रेममय बिनय सुनाई। कहति सचिव सन गिरा सुहाई।।
तुम्ह पितु ससुर सरिस हितकारी। उतरु देउँ फिरि अनुचित भारी।।
स्रोत अभिलेख 2.97 · पुस्तक पृ. 423, 424
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पतिहि प्रेममय बिनय सुनाई। कहति सचिव सन गिरा सुहाई।।
English explanation
Having addressed her husband with a loving plea, Sita speaks sweetly to the minister Sumantra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पतिहि | पति को | to her husband |
| प्रेममय | प्रेम से भरी | filled with love |
| बिनय | विनती | plea |
| सुनाई | सुनाकर | having spoken |
| कहति | कहती हैं | says |
| सचिव | मंत्री सुमंत्र | the minister Sumantra |
| सन | से | to |
| गिरा | वाणी | words |
| सुहाई | मधुर | pleasing |
2 तुम्ह पितु ससुर सरिस हितकारी। उतरु देउँ फिरि अनुचित भारी।।
English explanation
You care for my welfare like a father and father-in-law; for me to reply in return is highly improper.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| पितु | पिता | father |
| ससुर | ससुर | father-in-law |
| सरिस | के समान | like |
| हितकारी | हित चाहने वाले | one who seeks my welfare |
| उतरु | उत्तर | a reply |
| देउँ | मैं दूँ | I should give |
| फिरि | फिर; प्रत्युत्तर में | in return |
| अनुचित | अनुचित | improper |
| भारी | बहुत | highly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 424
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 423, 424
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।