अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिकल सनेहँ सीय सब रानीं। बैठन सबहि कहेउ गुर ग्यानीं।।
मूल पाठ
बिकल सनेहँ सीय सब रानीं। बैठन सबहि कहेउ गुर ग्यानीं।।
कहि जग गति मायिक मुनिनाथा। कहे कछुक परमारथ गाथा।।
स्रोत अभिलेख 2.247 · पुस्तक पृ. 549, 550
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी और सब रानियाँ स्नेहके मारे व्याकुल हैं। तब ज्ञानी गुरुने सबको बैठ जानेके लिये कहा। फिर मुनिनाथ वसिष्ठजीने जगत्की गतिको मायिक कहकर (अर्थात् जगत् मायाका है, इसमें कुछ भी नित्य नहीं है, ऐसा कहकर) कुछ परमार्थकी कथाएँ (बातें) कहीं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 549 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिकल सनेहँ सीय सब रानीं। बैठन सबहि कहेउ गुर ग्यानीं।।
English explanation
Sita and all the queens were distraught with affection. The wise preceptor asked everyone to sit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| सनेहँ | स्नेह से | with affection |
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सब | सभी | all |
| रानीं | रानियाँ | queens |
| बैठन | बैठने के लिए | to sit |
| सबहि | सबको | to everyone |
| कहेउ | कहा | said |
| गुर | गुरु वसिष्ठ | the preceptor Vasishtha |
| ग्यानीं | ज्ञानी | wise |
2 कहि जग गति मायिक मुनिनाथा। कहे कछुक परमारथ गाथा।।
English explanation
The chief sage explained the illusory nature of worldly existence and spoke somewhat about spiritual truth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहि | बताकर | having explained |
| जग | संसार की | of the world |
| गति | गति और दशा | course and condition |
| मायिक | मायामय | illusory |
| मुनिनाथा | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ ने | the chief sage Vasishtha |
| कहे | कहीं | spoke |
| कछुक | कुछ | some |
| परमारथ | परम सत्य और आध्यात्मिक हित की | of ultimate truth and spiritual welfare |
| गाथा | बातें | teachings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.247
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 549
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 549, 550
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