अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा। सुनि रघुनाथ दुसह दुखु पावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतदनन्तर वसिष्ठजीने राजा दशरथजीके स्वर्गगमनकी बात सुनायी, जिसे सुनकर रघुनाथजीने दु:सह दु:ख पाया। और अपने प्रति उनके स्नेहको उनके मरनेका कारण विचारकर धीरधुरन्धर श्रीरामचन्द्रजी अत्यन्त व्याकुल हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 549 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा। सुनि रघुनाथ दुसह दुखु पावा।।
मरन हेतु निज नेहु बिचारी। भे अति बिकल धीर धुर धारी।।
स्रोत अभिलेख 2.247 · पुस्तक पृ. 549, 550
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नृप कर सुरपुर गवनु सुनावा। सुनि रघुनाथ दुसह दुखु पावा।।
English explanation
He reported King Dasharatha’s departure to heaven. Hearing this, Rama suffered unbearable grief.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| कर | का | of |
| सुरपुर | स्वर्ग को | to heaven |
| गवनु | गमन | departure |
| सुनावा | समाचार सुनाया | reported |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| रघुनाथ | राम ने | Rama |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| दुखु | दुख | grief |
| पावा | अनुभव किया | experienced |
2 मरन हेतु निज नेहु बिचारी। भे अति बिकल धीर धुर धारी।।
English explanation
Reflecting that his father’s love for him had caused his death, Rama, foremost in fortitude, became deeply distraught.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मरन | मृत्यु का | of death |
| हेतु | कारण | cause |
| निज | अपने प्रति | toward himself |
| नेहु | प्रेम | love |
| बिचारी | विचारकर | reflecting on |
| भे | हो गए | became |
| अति | अत्यंत | deeply |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| धीर | धैर्यवानों की | of the steadfast |
| धुर | अग्रणी जिम्मेदारी | the foremost charge |
| धारी | धारण करने वाले | the bearer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.247
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 549
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 549, 550
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।