अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुलिस कठोर सुनत कटु बानी। बिलपत लखन सीय सब रानी।।
मूल पाठ
कुलिस कठोर सुनत कटु बानी। बिलपत लखन सीय सब रानी।।
सोक बिकल अति सकल समाजू। मानहुँ राजु अकाजेउ आजू।।
स्रोत अभिलेख 2.247 · पुस्तक पृ. 549, 550
भावार्थ
मूल पाठ के बादवज्रके समान कठोर, कड़वी वाणी सुनकर लक्ष्मणजी, सीताजी और सब रानियाँ विलाप करने लगीं। सारा समाज शोकसे अत्यन्त व्याकुल हो गया! मानो राजा आज ही मरे हों॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 549 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कुलिस कठोर सुनत कटु बानी। बिलपत लखन सीय सब रानी।।
English explanation
Hearing the bitter news, hard as a thunderbolt, Lakshmana, Sita, and all the queens lamented.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुलिस | वज्र के समान | like a thunderbolt |
| कठोर | कठोर | hard |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| कटु | दुखद | bitter |
| बानी | वचन या समाचार | words or news |
| बिलपत | विलाप करने लगे | lamented |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| सीय | सीता | Sita |
| सब | सभी | all |
| रानी | रानियाँ | queens |
2 सोक बिकल अति सकल समाजू। मानहुँ राजु अकाजेउ आजू।।
English explanation
The entire gathering was deeply overwhelmed with grief, as though the king had died that very day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक से | with grief |
| बिकल | व्याकुल | overwhelmed |
| अति | अत्यंत | deeply |
| सकल | सारा | the entire |
| समाजू | समुदाय | gathering |
| मानहुँ | मानो | as though |
| राजु | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| अकाजेउ | मृत्यु को प्राप्त हुए हों | had died |
| आजू | आज ही | this very day |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.247
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 549
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 549, 550
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।