अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुनिबर बहुरि राम समुझाए। सहित समाज सुसरित नहाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठजीेने श्रीरामजीको समझाया। तब उन्होंने समाजसहित श्रेष्ठ नदी मन्दाकिनीजीमें स्नान किया। उस दिन प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने निर्जल व्रत किया। मुनि वसिष्ठजीके कहनेपर भी किसीने जल ग्रहण नहीं किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 549 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनिबर बहुरि राम समुझाए। सहित समाज सुसरित नहाए।।
ब्रतु निरंबु तेहि दिन प्रभु कीन्हा। मुनिहु कहें जलु काहुँ न लीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 2.247 · पुस्तक पृ. 549, 550
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनिबर बहुरि राम समुझाए। सहित समाज सुसरित नहाए।।
English explanation
The eminent sage again consoled Rama. Rama bathed in the sacred river with the whole gathering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनिबर | मुनिश्रेष्ठ वसिष्ठ ने | the eminent sage Vasishtha |
| बहुरि | फिर | again |
| राम | राम को | Rama |
| समुझाए | समझाकर धीरज दिया | counseled and consoled |
| सहित | साथ | together with |
| समाज | समुदाय के | the gathering |
| सुसरित | पवित्र नदी में | in the sacred river |
| नहाए | स्नान किया | bathed |
2 ब्रतु निरंबु तेहि दिन प्रभु कीन्हा। मुनिहु कहें जलु काहुँ न लीन्हा।।
English explanation
That day Lord Rama observed a waterless fast. Even at the sage’s urging, no one drank water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्रतु | व्रत | a fast |
| निरंबु | बिना जल का | without water |
| तेहि | उस | that |
| दिन | दिन | day |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| कीन्हा | किया | observed |
| मुनिहु | मुनि के भी | even the sage’s |
| कहें | कहने पर | at the urging of |
| जलु | जल | water |
| काहुँ | किसी ने | anyone |
| न | नहीं | not |
| लीन्हा | लिया या पिया | took or drank |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.247
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 549
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 549, 550
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।