अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिकल बिलोकि सुतहि समुझावति। मनहुँ जरे पर लोनु लगावति।।
मूल पाठ
बिकल बिलोकि सुतहि समुझावति। मनहुँ जरे पर लोनु लगावति।।
तात राउ नहिं सोचे जोगू। बिढ़इ सुकृत जसु कीन्हेउ भोगू।।
स्रोत अभिलेख 2.161 · पुस्तक पृ. 477, 477
भावार्थ
मूल पाठ के बादपुत्रको व्याकुल देखकर कैकेयी समझाने लगी। मानो जलेपर नमक लगा रही हो। [वह बोली—] हे तात! राजा सोच करने योग्य नहीं हैं। उन्होंने पुण्य और यश कमाकर उसका पर्याप्त भोग किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 477 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिकल बिलोकि सुतहि समुझावति। मनहुँ जरे पर लोनु लगावति।।
English explanation
Seeing her distraught son, she tries to console him, as though applying salt to a burn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| सुतहि | पुत्र को | her son |
| समुझावति | समझाती है | tries to console |
| मनहुँ | मानो | as though |
| जरे | जले हुए स्थान | a burned spot |
| पर | पर | on |
| लोनु | नमक | salt |
| लगावति | लगाती है | applies |
2 तात राउ नहिं सोचे जोगू। बिढ़इ सुकृत जसु कीन्हेउ भोगू।।
English explanation
Son, the king is not someone to mourn: he earned great merit and fame and enjoyed life's pleasures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | बेटा | dear son |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| नहिं | नहीं | not |
| सोचे | शोक करने के | to be mourned |
| जोगू | योग्य | deserving |
| बिढ़इ | बहुत | abundant |
| सुकृत | पुण्य | merit from good deeds |
| जसु | यश | fame |
| कीन्हेउ | किया | did |
| भोगू | सुखों का भोग | enjoyment of pleasures |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.161
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 477
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 477, 477
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।