अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जीवत सकल जनम फल पाए। अंत अमरपति सदन सिधाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजीवनकालमें ही उन्होंने जन्म लेनेके सम्पूर्ण फल पा लिये और अन्तमें वे इन्द्रलोकको चले गये। ऐसा विचारकर सोच छोड़ दो और समाजसहित नगरका राज्य करो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 477 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जीवत सकल जनम फल पाए। अंत अमरपति सदन सिधाए।।
अस अनुमानि सोच परिहरहू। सहित समाज राज पुर करहू।।
स्रोत अभिलेख 2.161 · पुस्तक पृ. 477, 477
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जीवत सकल जनम फल पाए। अंत अमरपति सदन सिधाए।।
English explanation
During his lifetime he attained all the fruits of birth, and at the end departed for the abode of Indra, king of the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीवत | जीते जी | while alive |
| सकल | सभी | all |
| जनम | जन्म के | of birth |
| फल | फल | fruits |
| पाए | प्राप्त किए | attained |
| अंत | अंत में | at the end |
| अमरपति | देवताओं के राजा इंद्र का | of Indra, king of the gods |
| सदन | निवास | abode |
| सिधाए | चले गए | departed |
2 अस अनुमानि सोच परिहरहू। सहित समाज राज पुर करहू।।
English explanation
Considering this, abandon grief and rule in the city together with the community.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| अनुमानि | विचार करके | having considered |
| सोच | शोक | grief |
| परिहरहू | छोड़ दो | give up |
| सहित | साथ लेकर | together with |
| समाज | समाज को | the community |
| राज | राज्य | rule |
| पुर | नगर में | in the city |
| करहू | करो | exercise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.161
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 477
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 477, 477
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।