अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुठि सहमेउ राजकुमारू। पाकें छत जनु लाग अँगारू।।
मूल पाठ
सुनि सुठि सहमेउ राजकुमारू। पाकें छत जनु लाग अँगारू।।
धीरज धरि भरि लेहिं उसासा। पापनि सबहि भाँति कुल नासा।।
स्रोत अभिलेख 2.161 · पुस्तक पृ. 477, 477
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजकुमार भरतजी यह सुनकर बहुत ही सहम गये। मानो पके घावपर अँगार छू गया हो। उन्होंने धीरज धरकर बड़ी लंबी साँस लेते हुए कहा—पापिनी! तूने सभी तरहसे कुलका नाश कर दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 477 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि सुठि सहमेउ राजकुमारू। पाकें छत जनु लाग अँगारू।।
English explanation
Hearing this, Prince Bharata was deeply shaken, as though a burning coal had touched a festering wound.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुठि | बहुत | greatly |
| सहमेउ | सहम गए | was shaken |
| राजकुमारू | राजकुमार भरत | Prince Bharata |
| पाकें | पके हुए | festering |
| छत | घाव पर | on a wound |
| जनु | मानो | as though |
| लाग | लग गया | touched |
| अँगारू | जलता अंगारा | a burning coal |
2 धीरज धरि भरि लेहिं उसासा। पापनि सबहि भाँति कुल नासा।।
English explanation
Gathering his composure, Bharata heaves a deep sigh and says: Sinful woman, you have ruined the family in every way.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धीरज | धैर्य | composure |
| धरि | धारण करके | gathering |
| भरि | भरकर; गहरी | deeply |
| लेहिं | लेते हैं | takes |
| उसासा | आह | a sigh |
| पापनि | हे पापिनी | O sinful woman |
| सबहि | सभी | every |
| भाँति | तरह से | way |
| कुल | कुल का | the family |
| नासा | नाश किया | ruined |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.161
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 477
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 477, 477
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।