अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीतापति श्रीरामचन्द्रजी पुन: सोचके वश हो गये कि भरतके आनेका क्या कारण है? फिर एकने आकर ऐसा कहा कि उनके साथमें बड़ी भारी चतुरङ्गिणी सेना भी है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 532 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू।।
एक आइ अस कहा बहोरी। सेन संग चतुरंग न थोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.227 · पुस्तक पृ. 532, 533
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बहुरि सोचबस भे सियरवनू। कारन कवन भरत आगवनू।।
English explanation
Rama, Sita’s beloved, again became anxious: what was the reason for Bharata’s arrival? (This is an AI draft; the reading ‘सियरवनू’ is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहुरि | फिर | again |
| सोचबस | चिंता के वश में | overcome by worry |
| भे | हो गए | became |
| सियरवनू | सीता के प्रिय राम | Rama, Sita’s beloved |
| कारन | कारण | reason |
| कवन | क्या | what |
| भरत | राम के भाई भरत का | of Bharata, Rama’s brother |
| आगवनू | आगमन | arrival |
2 एक आइ अस कहा बहोरी। सेन संग चतुरंग न थोरी।।
English explanation
Then someone came and reported that Bharata was accompanied by a sizeable army with all four divisions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक व्यक्ति | one person |
| आइ | आकर | having come |
| अस | ऐसा | thus |
| कहा | कहा | said |
| बहोरी | फिर | then; again |
| सेन | सेना | army |
| संग | साथ | with him |
| चतुरंग | चार अंगों वाली | having four divisions |
| न | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ी; छोटी | small |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.227
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 532
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 532, 533
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।