अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुनि रामहि भा अति सोचू। इत पितु बच इत बंधु सकोचू।।
मूल पाठ
सो सुनि रामहि भा अति सोचू। इत पितु बच इत बंधु सकोचू।।
भरत सुभाउ समुझि मन माहीं। प्रभु चित हित थिति पावत नाही।।
स्रोत अभिलेख 2.227 · पुस्तक पृ. 532, 533
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सुनकर श्रीरामचन्द्रजीको अत्यन्त सोच हुआ। इधर तो पिताके वचन और इधर भाई भरतजीका संकोच ! भरतजीके स्वभावको मनमें समझकर तो प्रभु श्रीरामचन्द्रजी चित्तको ठहरानेके लिये कोई स्थान ही नहीं पाते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 532 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो सुनि रामहि भा अति सोचू। इत पितु बच इत बंधु सकोचू।।
English explanation
Hearing this, Rama became deeply concerned: on one side was his father’s word, and on the other his reluctance to disappoint his brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह बात | that report |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| रामहि | राम को | to Rama |
| भा | हुई | arose |
| अति | बहुत | great |
| सोचू | चिंता | concern |
| इत | एक ओर | on one side |
| पितु | पिता का | father’s |
| बच | वचन | word; command |
| इत | दूसरी ओर | on the other side |
| बंधु | भाई के प्रति | toward his brother |
| सकोचू | संकोच; मन रखने की चिंता | reluctance to disappoint |
2 भरत सुभाउ समुझि मन माहीं। प्रभु चित हित थिति पावत नाही।।
English explanation
Reflecting inwardly on Bharata’s nature, the Lord’s mind could find no ease or stability.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| समुझि | विचार करके | considering |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
| प्रभु | प्रभु राम का | of Lord Rama |
| चित | चित्त | mind |
| हित | चैन; सुख | ease; well-being |
| थिति | स्थिरता; स्थिति | stability; settled state |
| पावत | पा रहा था | was finding |
| नाही | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.227
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 532
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 532, 533
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।