अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
समाधान तब भा यह जाने। भरतु कहे महुँ साधु सयाने।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब यह जानकर समाधान हो गया कि भरत साधु और सयाने हैं तथा मेरे कहनेमें (आज्ञाकारी) हैं। लक्ष्मणजीने देखा कि प्रभु श्रीरामजीके हृदयमें चिन्ता है तो वे समयके अनुसार अपना नीतियुक्त विचार कहने लगे—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 532 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
समाधान तब भा यह जाने। भरतु कहे महुँ साधु सयाने।।
लखन लखेउ प्रभु हृदयँ खभारू। कहत समय सम नीति बिचारू।।
स्रोत अभिलेख 2.227 · पुस्तक पृ. 532, 533
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 समाधान तब भा यह जाने। भरतु कहे महुँ साधु सयाने।।
English explanation
He then found reassurance in knowing that Bharata was virtuous and wise, and would heed what he was told.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समाधान | समाधान; आश्वस्ति | reassurance |
| तब | तब | then |
| भा | हुआ | came about |
| यह | यह | this |
| जाने | जानकर | on realizing |
| भरतु | भरत | Bharata, Rama’s brother |
| कहे | कहने | being told |
| महुँ | पर; में | upon; in |
| साधु | सज्जन; साधु | virtuous |
| सयाने | समझदार | wise; sensible |
2 लखन लखेउ प्रभु हृदयँ खभारू। कहत समय सम नीति बिचारू।।
English explanation
Lakshmana perceived the uneasiness in the Lord’s heart and began expressing considerations of prudence suited to the occasion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| लखेउ | देख लिया; समझ लिया | perceived |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| खभारू | खलबली; बेचैनी | agitation; uneasiness |
| कहत | कहने लगे | began saying |
| समय | अवसर के | to the occasion |
| सम | अनुरूप | suited |
| नीति | नीति; विवेकपूर्ण आचरण | prudence; sound conduct |
| बिचारू | विचार | considerations |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.227
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 532
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 532, 533
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।