अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनु पूँछ कछु कहउँ गोसाईं। सेवकु समयँ न ढीठ ढिठाई।।
मूल पाठ
बिनु पूँछ कछु कहउँ गोसाईं। सेवकु समयँ न ढीठ ढिठाई।।
तुम्ह सर्बग्य सिरोमनि स्वामी। आपनि समुझि कहउँ अनुगामी।।
स्रोत अभिलेख 2.227 · पुस्तक पृ. 532, 533
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे स्वामी! आपके बिना ही पूछे मैं कुछ कहता हूँ; सेवक समयपर ढिठाई करनेसे ढीठ नहीं समझा जाता (अर्थात् आप पूछें तब मैं कहूँ, ऐसा अवसर नहीं है; इसीलिये यह मेरा कहना ढिठाई नहीं होगा)। हे स्वामी! आप सर्वज्ञोंमें शिरोमणि हैं (सब जानते ही हैं)। मैं सेवक तो अपनी समझकी बात कहता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 533 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिनु पूँछ कछु कहउँ गोसाईं। सेवकु समयँ न ढीठ ढिठाई।।
English explanation
My lord, I speak a little without being asked. When the occasion calls for it, such boldness from a servant is not insolence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| पूँछ | पूछे जाने | being asked |
| कछु | कुछ | something |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| गोसाईं | हे स्वामी | O my lord |
| सेवकु | सेवक | a servant |
| समयँ | उचित अवसर पर | when the occasion calls for it |
| न | नहीं | not |
| ढीठ | धृष्ट; निर्भीक होकर बोलने वाला | bold; speaking unbidden |
| ढिठाई | ढिठाई; धृष्टता | insolence |
2 तुम्ह सर्बग्य सिरोमनि स्वामी। आपनि समुझि कहउँ अनुगामी।।
English explanation
You are foremost among those who know all, and you are my master; as your follower, I speak according to my own understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| सर्बग्य | सब जानने वालों में | among those who know all |
| सिरोमनि | शिरोमणि; सर्वश्रेष्ठ | foremost; crown jewel |
| स्वामी | स्वामी | master |
| आपनि | अपनी | my own |
| समुझि | समझ के अनुसार | according to understanding |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I speak |
| अनुगामी | आपका अनुयायी | your follower |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.227
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 533
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 532, 533
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।