अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा।।
मूल पाठ
बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा।।
अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा। जनु मरुभूमि कलपतरु जामा।।
स्रोत अभिलेख 2.223 · पुस्तक पृ. 529, 529
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो बुरे देश (जंगली प्रान्त) और बुरे गाँवमें बसती हैं और [स्त्रियोंमें भी] नीच स्त्रियाँ हैं! और कहाँ यह महान् पुण्योंका परिणामस्वरूप इनका दर्शन ! ऐसा ही आनन्द और आश्चर्य गाँव- गाँवमें हो रहा है। मानो मरुभूमिमें कल्पवृक्ष उग गया हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 529 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बसहिं कुदेस कुगाँव कुबामा। कहँ यह दरसु पुन्य परिनामा।।
English explanation
What a contrast between us, unworthy women living in poor regions and villages, and this blessed sight, the fruit of merit!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बसहिं | रहती हैं; हम रहती हैं | live; we live |
| कुदेस | बुरे प्रदेश में | in an unfavorable region |
| कुगाँव | बुरे गाँव में | in an unfavorable village |
| कुबामा | बुरी स्त्रियाँ | unworthy women |
| कहँ | कहाँ | where; in contrast |
| यह | यह | this |
| दरसु | भरत का दर्शन | the sight of Bharata |
| पुन्य | पुण्य का | of spiritual merit |
| परिनामा | फल | fruit; result |
2 अस अनंदु अचिरिजु प्रति ग्रामा। जनु मरुभूमि कलपतरु जामा।।
English explanation
Such joy and wonder filled every village, as though a wish-fulfilling tree had sprouted in a desert.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| अनंदु | आनंद | joy |
| अचिरिजु | आश्चर्य | wonder |
| प्रति | प्रत्येक | every |
| ग्रामा | गाँव में | in the village |
| जनु | मानो | as though |
| मरुभूमि | मरुभूमि में | in a desert |
| कलपतरु | मनोकामना पूरी करने वाला कल्पवृक्ष | a wish-fulfilling tree |
| जामा | उग आया | had sprouted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.223
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 529
- सहायक विषय
- भरतजी चित्रकूटके मार्गमें
- मुद्रित पृष्ठ
- 529, 529
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।