अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरनि न जाइ दसा तिन्ह केरी। लहि जनु रंकन्ह सुरमनि ढेरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनकी दशा वर्णन नहीं की जाती। मानो दरिद्रोंने चिन्तामणिकी ढेरी पा ली हो। वे एक-एकको पुकारकर सीख देते हैं कि इसी क्षण नेत्रोंका लाभ ले लो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 438 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बरनि न जाइ दसा तिन्ह केरी। लहि जनु रंकन्ह सुरमनि ढेरी।।
एकन्ह एक बोलि सिख देहीं। लोचन लाहु लेहु छन एहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.114 · पुस्तक पृ. 438, 438
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बरनि न जाइ दसा तिन्ह केरी। लहि जनु रंकन्ह सुरमनि ढेरी।।
English explanation
Their condition cannot be described, as though paupers had found a heap of heavenly gems.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| दसा | दशा | condition |
| तिन्ह | उन लोगों की | of those people |
| केरी | की | belonging to |
| लहि | पा लिया हो | had obtained |
| जनु | मानो | as though |
| रंकन्ह | निर्धनों ने | paupers |
| सुरमनि | देवमणियों का; चिंतामणि जैसे दिव्य रत्नों का | of heavenly, wish-fulfilling gems |
| ढेरी | ढेर | a heap |
2 एकन्ह एक बोलि सिख देहीं। लोचन लाहु लेहु छन एहीं।।
English explanation
Some call others and advise them: take the reward of your eyes at this very moment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकन्ह | कुछ लोगों को | to some others |
| एक | कुछ लोग | some people |
| बोलि | बुलाकर | having called |
| सिख | सीख; सलाह | advice |
| देहीं | देते हैं | give |
| लोचन | नेत्रों का | of the eyes |
| लाहु | लाभ | reward; benefit |
| लेहु | ले लो | take; obtain |
| छन | क्षण में | at the moment |
| एहीं | इसी | this very |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 438
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 438, 438
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।