अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम लखन सिय रूप निहारी। पाइ नयनफलु होहिं सुखारी।।
मूल पाठ
राम लखन सिय रूप निहारी। पाइ नयनफलु होहिं सुखारी।।
सजल बिलोचन पुलक सरीरा। सब भए मगन देखि दोउ बीरा।।
स्रोत अभिलेख 2.114 · पुस्तक पृ. 438, 438
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीराम, लक्ष्मण और सीताजीका रूप देखकर, नेत्रोंका [परम] फल पाकर वे सुखी होते हैं। दोनों भाइयोंको देखकर सब प्रेमानन्दमें मग्र हो गये। उनके नेत्रोंमें जल भर आया और शरीर पुलकित हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 438 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 राम लखन सिय रूप निहारी। पाइ नयनफलु होहिं सुखारी।।
English explanation
Beholding the beauty of Rama, Lakshmana, and Sita, they obtain the reward of their sight and become happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Rama |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| सिय | सीता | Sita |
| रूप | सुंदर रूप | beautiful appearance |
| निहारी | देखकर | having beheld |
| पाइ | पाकर | having obtained |
| नयनफलु | नेत्रों का फल; देखने की सार्थकता | the reward of sight; fulfillment of seeing |
| होहिं | होते हैं | become |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 सजल बिलोचन पुलक सरीरा। सब भए मगन देखि दोउ बीरा।।
English explanation
Seeing the two heroic brothers, everyone became absorbed in joy, their eyes filled with tears and their bodies thrilled.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| बिलोचन | नेत्र | eyes |
| पुलक | रोमांच | thrill with hair standing on end |
| सरीरा | शरीर | bodies |
| सब | सभी | everyone |
| भए | हो गए | became |
| मगन | आनंद में मग्न | absorbed in joy |
| देखि | देखकर | having seen |
| दोउ | दोनों | both |
| बीरा | वीर भाई, राम और लक्ष्मण | heroic brothers, Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 438
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 438, 438
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।