अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीता लखन सहित रघुराई। गाँव निकट जब निकसहिं जाई।।
मूल पाठ
सीता लखन सहित रघुराई। गाँव निकट जब निकसहिं जाई।।
सुनि सब बाल बृद्ध नर नारी। चलहिं तुरत गृहकाजु बिसारी।।
स्रोत अभिलेख 2.114 · पुस्तक पृ. 438, 438
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी और लक्ष्मणजीसहित श्रीरघुनाथजी जब किसी गाँवके पास जा निकलते हैं तब उनका आना सुनते ही बालक-बूढ़े, स्त्री-पुरुष सब अपने घर और काम-काजको भूलकर तुरंत उन्हें देखनेके लिये चल देते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 438 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीता लखन सहित रघुराई। गाँव निकट जब निकसहिं जाई।।
English explanation
When Rama passes near a village with Sita and Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| लखन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| सहित | साथ | together with |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| गाँव | गाँव के | a village |
| निकट | पास | near |
| जब | जब | when |
| निकसहिं | निकलते हैं | pass by |
| जाई | चलते हुए | while going along |
2 सुनि सब बाल बृद्ध नर नारी। चलहिं तुरत गृहकाजु बिसारी।।
English explanation
Hearing this, all the children, elders, men, and women immediately set out, leaving their household tasks behind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सब | सभी | all |
| बाल | बच्चे | children |
| बृद्ध | वृद्ध लोग | elderly people |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| चलहिं | चल पड़ते हैं | set out |
| तुरत | तुरंत | immediately |
| गृहकाजु | घर के काम | household tasks |
| बिसारी | छोड़कर | leaving aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 438
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 438, 438
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।