अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बन रघुपति सुरपति नरनाहू। तुम्ह एहि भाँति तात कदराहू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरघुनाथजी वनमें हैं, महाराज स्वर्गका राज्य करने चले गये। और हे तात! तुम इस प्रकार कातर हो रहे हो। हे पुत्र! कुटुम्ब, प्रजा, मन्त्री और सब माताओंके—सबके एक तुम ही सहारे हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 489 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बन रघुपति सुरपति नरनाहू। तुम्ह एहि भाँति तात कदराहू।।
परिजन प्रजा सचिव सब अंबा। तुम्हही सुत सब कहँ अवलंबा।।
स्रोत अभिलेख 2.176 · पुस्तक पृ. 489, 489
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बन रघुपति सुरपति नरनाहू। तुम्ह एहि भाँति तात कदराहू।।
English explanation
Rama is in the forest, and King Dasharatha is in heaven; dear son, you are becoming so distraught.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन में | in the forest |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| सुरपति | देवराज इंद्र के पास, स्वर्ग में | with Indra, lord of the gods—in heaven |
| नरनाहू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| तुम्ह | तुम, भरत | you, Bharata |
| एहि | इस | this |
| भाँति | प्रकार | way |
| तात | हे प्यारे पुत्र | dear son |
| कदराहू | कातर हो रहे हो | are becoming distraught |
2 परिजन प्रजा सचिव सब अंबा। तुम्हही सुत सब कहँ अवलंबा।।
English explanation
The family, the subjects, the ministers, and all the mothers—son, you alone are their support.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परिजन | परिवारजन | family members |
| प्रजा | राज्य के लोग | the subjects |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| सब | सभी | all |
| अंबा | माताएँ | mothers |
| तुम्हही | तुम ही | you alone |
| सुत | हे पुत्र | son |
| सब | सबके | all |
| कहँ | लिए | for |
| अवलंबा | सहारा | support |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.176
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 489
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 489, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।