अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौसल्या धरि धीरजु कहई। पूत पथ्य गुर आयसु अहई।।
मूल पाठ
कौसल्या धरि धीरजु कहई। पूत पथ्य गुर आयसु अहई।।
सो आदरिअ करिअ हित मानी। तजिअ बिषादु काल गति जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.176 · पुस्तक पृ. 489, 489
भावार्थ
मूल पाठ के बादकौसल्याजी भी धीरज धरकर कह रही हैं—हे पुत्र! गुरुजीकी आज्ञा पथ्यरूप है। उसका आदर करना चाहिये और हित मानकर उसका पालन करना चाहिये। कालकी गतिको जानकर विषादका त्याग कर देना चाहिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 489 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कौसल्या धरि धीरजु कहई। पूत पथ्य गुर आयसु अहई।।
English explanation
Gathering her composure, Kausalya says, “Son, the guru’s command is beneficial.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्या | राम की माता कौसल्या | Kausalya, Rama’s mother |
| धरि | धारण करके | having gathered |
| धीरजु | धैर्य | composure |
| कहई | कहती हैं | says |
| पूत | हे पुत्र | dear son |
| पथ्य | हितकारी | beneficial |
| गुर | गुरु वसिष्ठ की | of the guru, Vasishtha |
| आयसु | आज्ञा | command |
| अहई | है | is |
2 सो आदरिअ करिअ हित मानी। तजिअ बिषादु काल गति जानी।।
English explanation
Honor that command and carry it out, recognizing it as beneficial. Understand the course of time and relinquish sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस आज्ञा को | that command |
| आदरिअ | आदर दो | honor |
| करिअ | पालन करो | carry out |
| हित | हितकारी | beneficial |
| मानी | मानकर | recognizing as |
| तजिअ | छोड़ दो | relinquish |
| बिषादु | शोक | sorrow |
| काल | समय की | of time |
| गति | गति | course |
| जानी | जानकर | understanding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.176
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 489
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 489, 489
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।