अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे।।
मूल पाठ
बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे।।
बिपुल बिचित्र बिहग मृग नाना। प्रजा समाजु न जाइ बखाना।।
स्रोत अभिलेख 2.236 · पुस्तक पृ. 540, 540
भावार्थ
मूल पाठ के बादवनरूपी प्रान्तोंमें जो मुनियोंके बहुत-से निवासस्थान हैं वही मानो शहरों, नगरों, गाँवों और खेड़ोंका समूह है। बहुत-से विचित्र पक्षी और अनेकों पशु ही मानो प्रजाओंका समाज है, जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 540 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बन प्रदेस मुनि बास घनेरे। जनु पुर नगर गाउँ गन खेरे।।
English explanation
The forest region has numerous hermitages, like a multitude of cities, towns, villages, and hamlets.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन | forest |
| प्रदेस | प्रदेश में | in the region |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| बास | निवास या आश्रम | dwellings or hermitages |
| घनेरे | बहुत-से | numerous |
| जनु | मानो | as though |
| पुर | बड़े नगर | cities |
| नगर | नगर | towns |
| गाउँ | गाँव | villages |
| गन | समूह; अनेक | a multitude of |
| खेरे | छोटे गाँव या खेड़े | hamlets |
2 बिपुल बिचित्र बिहग मृग नाना। प्रजा समाजु न जाइ बखाना।।
English explanation
There are abundant, varied birds and beasts of many kinds; this community, like a kingdom’s subjects, is beyond description.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिपुल | बहुत-से | abundant |
| बिचित्र | विविध और अनोखे | varied and remarkable |
| बिहग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
| प्रजा | राज्य की प्रजा के समान जीव | creatures likened to subjects |
| समाजु | समुदाय | community |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| बखाना | वर्णित किया | described |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.236
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 540
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 540, 540
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।