अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खगहा करि हरि बाघ बराहा। देखि महिष बृष साजु सराहा।।
मूल पाठ
खगहा करि हरि बाघ बराहा। देखि महिष बृष साजु सराहा।।
बयरु बिहाइ चरहिं एक संगा। जहँ तहँ मनहुँ सेन चतुरंगा।।
स्रोत अभिलेख 2.236 · पुस्तक पृ. 540, 540
भावार्थ
मूल पाठ के बादगैंडा, हाथी, सिंह, बाघ, सूअर, भैंसे और बैलोंको देखकर राजाके साजको सराहते ही बनता है। ये सब आपसका वैर छोड़कर जहाँ-तहाँ एक साथ विचरते हैं। यही मानो चतुरङ्गिणी सेना है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 540 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 खगहा करि हरि बाघ बराहा। देखि महिष बृष साजु सराहा।।
English explanation
Seeing rhinoceroses, elephants, lions, tigers, wild boars, buffaloes, and bulls, Bharata admired this array.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खगहा | गैंडे | rhinoceroses |
| करि | हाथी | elephants |
| हरि | सिंह | lions |
| बाघ | बाघ | tigers |
| बराहा | जंगली सूअर | wild boars |
| देखि | देखकर | having seen |
| महिष | भैंसे | buffaloes |
| बृष | बैल | bulls |
| साजु | साज-सज्जा; सजी हुई व्यवस्था | array; arrangement |
| सराहा | सराहना की | admired |
2 बयरु बिहाइ चरहिं एक संगा। जहँ तहँ मनहुँ सेन चतुरंगा।।
English explanation
Abandoning enmity, they graze together, as though a fourfold army were stationed everywhere.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बयरु | वैर | enmity |
| बिहाइ | छोड़कर | having abandoned |
| चरहिं | चरते हैं | graze |
| एक | एक ही; साथ | one; together |
| संगा | संग | in company |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ | there |
| मनहुँ | मानो | as though |
| सेन | सेना | army |
| चतुरंगा | चार अंगों वाली | fourfold |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.236
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 540
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 540, 540
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।