अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रीति प्रतीति बचन मन करनी। श्रीमुख राम प्रेम बस बरनी।।
मूल पाठ
प्रीति प्रतीति बचन मन करनी। श्रीमुख राम प्रेम बस बरनी।।
तेहि अवसर खग मृग जल मीना। चित्रकूट चर अचर मलीना।।
स्रोत अभिलेख 2.321 · पुस्तक पृ. 612, 613
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामचन्द्रजीने प्रेमके वश होकर भरतजीके वचन, मन, कर्मकी प्रीति तथा विश्वासका अपने श्रीमुखसे वर्णन किया। उस समय पक्षी, पशु और जलकी मछलियाँ, चित्रकूटके सभी चेतन और जड़ जीव उदास हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 612 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रीति प्रतीति बचन मन करनी। श्रीमुख राम प्रेम बस बरनी।।
English explanation
Moved by love, Rama himself described the love and trust expressed in Bharata’s words, mind, and conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रीति | प्रेम | love |
| प्रतीति | विश्वास | trust |
| बचन | वचन में | in words |
| मन | मन में | in thought |
| करनी | आचरण में | in conduct |
| श्रीमुख | अपने पवित्र मुख से | with his own revered lips |
| राम | राम ने | Rama |
| प्रेम | प्रेम के | of love |
| बस | वश में होकर | under the influence |
| बरनी | वर्णन किया | described |
2 तेहि अवसर खग मृग जल मीना। चित्रकूट चर अचर मलीना।।
English explanation
At that moment, birds, wild animals, fish in the water, and all moving and unmoving beings of Chitrakuta became sorrowful.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहि | उस | that |
| अवसर | समय | moment |
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| जल | जल की | in the water |
| मीना | मछलियाँ | fish |
| चित्रकूट | चित्रकूट के | of Chitrakuta |
| चर | चलने वाले जीव | moving beings |
| अचर | अचल वृक्ष आदि | unmoving beings, such as trees |
| मलीना | उदास | sorrowful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.321
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 612
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 612, 613
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।