अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं। प्रिय परिजन बियोग बिलखाहीं।।
मूल पाठ
प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं। प्रिय परिजन बियोग बिलखाहीं।।
भरत सनेह सुभाउ सुबानी। प्रिया अनुज सन कहत बखानी।।
स्रोत अभिलेख 2.321 · पुस्तक पृ. 612, 613
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरामचन्द्रजी, सीताजी और लक्ष्मणजी बड़की छायामें बैठकर प्रियजन एवं परिवारके वियोगसे दुखी हो रहे हैं। भरतजीके स्नेह, स्वभाव और सुन्दर वाणीको बखान-बखानकर वे प्रिय पत्नी सीताजी और छोटे भाई लक्ष्मणजीसे कहने लगे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 612 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु सिय लखन बैठि बट छाहीं। प्रिय परिजन बियोग बिलखाहीं।।
English explanation
Lord Rama, Sita, and Lakshmana sit in the banyan’s shade, weeping over separation from their beloved family.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सिय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| बैठि | बैठकर | having sat down |
| बट | वटवृक्ष की | of the banyan tree |
| छाहीं | छाया में | in the shade |
| प्रिय | प्यारे | beloved |
| परिजन | परिवारजनों के | of family members |
| बियोग | वियोग में | in separation |
| बिलखाहीं | बिलखते हैं | weep sorrowfully |
2 भरत सनेह सुभाउ सुबानी। प्रिया अनुज सन कहत बखानी।।
English explanation
Rama describes Bharata’s affection, nature, and gracious speech to his beloved wife and younger brother.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का | of Bharata, Rama’s brother |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| सुबानी | सुंदर वाणी | gracious speech |
| प्रिया | प्रिय पत्नी सीता | his beloved wife Sita |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| सन | से | to |
| कहत | कहते हैं | speaks |
| बखानी | विस्तार से वर्णन करके | describing in detail |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.321
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 612
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 612, 613
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।