अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की। बरषि सुमन कहि गति घर घर की।।
मूल पाठ
बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की। बरषि सुमन कहि गति घर घर की।।
प्रभु प्रनामु करि दीन्ह भरोसो। चले मुदित मन डर न खरो सो।।
स्रोत अभिलेख 2.321 · पुस्तक पृ. 612, 613
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीकी दशा देखकर देवताओंने उनपर फूल बरसाकर अपनी घर-घरकी दशा कही (दुखड़ा सुनाया)। प्रभु श्रीरामचन्द्रजीने उन्हें प्रणाम कर आश्वासन दिया। तब वे प्रसन्न होकर चले, मनमें जरा-सा भी डर न रहा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 612 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बिबुध बिलोकि दसा रघुबर की। बरषि सुमन कहि गति घर घर की।।
English explanation
Seeing Rama’s condition, the gods showered flowers and said that such is the plight of every household.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिबुध | देवताओं ने | the gods |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| दसा | दशा | condition |
| रघुबर | रघुकुलश्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| की | की | of |
| बरषि | बरसाकर | having showered |
| सुमन | फूल | flowers |
| कहि | कहा | said |
| गति | दशा | plight |
| घर | घर | household |
| घर | हर घर | each household |
| की | की | of |
2 प्रभु प्रनामु करि दीन्ह भरोसो। चले मुदित मन डर न खरो सो।।
English explanation
Lord Rama bowed and reassured the gods. They departed gladly, and that fear no longer remained in their minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| करि | करके | having made |
| दीन्ह | दिया | gave |
| भरोसो | आश्वासन | reassurance |
| चले | देवता चले गए | the gods departed |
| मुदित | प्रसन्न | glad |
| मन | मन से; मन में | in their minds |
| डर | भय | fear |
| न | नहीं | not |
| खरो | रहा | remained |
| सो | वह | that |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.321
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 612
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 612, 613
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।