अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई। चले सीस धरि राम रजाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभुके चरणकमलोंकी वन्दना करके तथा श्रीरामजीकी आज्ञाको सिरपर रखकर भरत-शत्रुघ्र दोनों भाई चले। मुनि, तपस्वी और वनदेवता सबका बार-बार सम्मान करके उनकी विनती की॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 610 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई। चले सीस धरि राम रजाई।।
मुनि तापस बनदेव निहोरी। सब सनमानि बहोरि बहोरी।।
स्रोत अभिलेख 2.318 · पुस्तक पृ. 610, 610
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु पद पदुम बंदि दोउ भाई। चले सीस धरि राम रजाई।।
English explanation
After bowing to the Lord’s lotus feet, the two brothers departed, reverently accepting Rama’s command.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| पदुम | कमल | lotuses |
| बंदि | वंदना करके | having bowed to |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई, भरत और शत्रुघ्न | brothers, Bharata and Shatrughna |
| चले | चल पड़े | departed |
| सीस | सिर पर | on their heads |
| धरि | धारण करके | having placed; reverently accepting |
| राम | राम की | Rama’s |
| रजाई | आज्ञा | command |
2 मुनि तापस बनदेव निहोरी। सब सनमानि बहोरि बहोरी।।
English explanation
They departed after humbly entreating the sages, ascetics, and forest deities, and repeatedly paying respect to them all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों से | the sages |
| तापस | तपस्वियों से | the ascetics |
| बनदेव | वन के देवताओं से | the forest deities |
| निहोरी | विनय करके; विनम्र प्रार्थना करके | humbly entreating |
| सब | सबका | all of them |
| सनमानि | सम्मान करके | honoring |
| बहोरि | फिर | again |
| बहोरी | फिर; बार-बार | again; repeatedly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.318
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 610
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 610, 610
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।