अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेवक सचिव भरत रुख पाई। निज निज काज लगे सब जाई।।
मूल पाठ
सेवक सचिव भरत रुख पाई। निज निज काज लगे सब जाई।।
सुनि दारुन दुखु दुहूँ समाजा। लगे चलन के साजन साजा।।
स्रोत अभिलेख 2.318 · पुस्तक पृ. 610, 610
भावार्थ
मूल पाठ के बादसेवक और मन्त्री भरतजीका रुख पाकर सब अपने-अपने काममें जा लगे। यह सुनकर दोनों समाजोंमें दारुण दु:ख छा गया। वे चलनेकी तैयारियाँ करने लगे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 610 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सेवक सचिव भरत रुख पाई। निज निज काज लगे सब जाई।।
English explanation
Receiving Bharata’s indication, all the servants and ministers went to attend to their respective tasks.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | सेवक | servants |
| सचिव | मंत्री | ministers |
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| रुख | संकेत; अभिप्राय | indication; intention |
| पाई | पाकर; समझकर | receiving; understanding |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के अलग-अलग | respective |
| काज | काम में | tasks |
| लगे | लग गए | set about |
| सब | सब | all |
| जाई | जाकर | having gone |
2 सुनि दारुन दुखु दुहूँ समाजा। लगे चलन के साजन साजा।।
English explanation
Hearing this, both assemblies felt terrible sorrow and began making preparations to depart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | on hearing this |
| दारुन | भीषण | terrible |
| दुखु | दुःख | sorrow |
| दुहूँ | दोनों | both |
| समाजा | समाजों को; जनसमूहों को | assemblies |
| लगे | करने लगे | began |
| चलन | प्रस्थान | departure |
| के | के लिए | for |
| साजन | तैयारियाँ; आवश्यक सामान | arrangements; necessary equipment |
| साजा | तैयार करने | to make ready |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.318
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 610
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 610, 610
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।