अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु अपने नीचहु आदरहीं। अगिनि धूम गिरि सिर तिनु धरहीं।।
मूल पाठ
प्रभु अपने नीचहु आदरहीं। अगिनि धूम गिरि सिर तिनु धरहीं।।
सेवकु राउ करम मन बानी। सदा सहाय महेसु भवानी।।
स्रोत अभिलेख 2.285 · पुस्तक पृ. 581, 582
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु अपने नीच जनोंका भी आदर करते हैं। अग्रि धुएँको और पर्वत तृण (घास) को अपने सिरपर धारण करते हैं। हमारे राजा तो कर्म, मन और वाणीसे आपके सेवक हैं और सदा सहायक तो श्रीमहादेव-पार्वतीजी हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 581 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रभु अपने नीचहु आदरहीं। अगिनि धूम गिरि सिर तिनु धरहीं।।
English explanation
Great ones honor even their lowly dependents: fire bears smoke above itself, and a mountain bears grass upon its summit.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | स्वामी अथवा बड़े जन | masters or great ones |
| अपने | अपने आश्रितों को | their own dependents |
| नीचहु | छोटे होने पर भी | even when lowly |
| आदरहीं | आदर देते हैं | honor |
| अगिनि | अग्नि | fire |
| धूम | धुआँ | smoke |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| सिर | सिर पर | upon the head |
| तिनु | तिनका या घास | a blade of grass |
| धरहीं | रखते हैं | bear |
2 सेवकु राउ करम मन बानी। सदा सहाय महेसु भवानी।।
English explanation
King Janaka is your servant in deed, thought, and speech; Shiva and Bhavani are always your helpers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवकु | सेवक | servant |
| राउ | राजा जनक | King Janaka |
| करम | कर्म से | in deed |
| मन | मन से | in thought |
| बानी | वाणी से | in speech |
| सदा | सदा | always |
| सहाय | सहायक | helpers |
| महेसु | शिव | Shiva |
| भवानी | पार्वती | Parvati |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.285
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 581
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 581, 582
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।