अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लखि सनेह सुनि बचन बिनीता। जनकप्रिया गह पाय पुनीता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकौसल्याजीके प्रेमको देखकर और उनके विनम्र वचनोंको सुनकर जनकजीकी प्रिय पत्नीने उनके पवित्र चरण पकड़ लिये और कहा—हे देवि! आप राजा दशरथजीकी रानी और श्रीरामजीकी माता हैं। आपकी ऐसी नम्रता उचित ही है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 581 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लखि सनेह सुनि बचन बिनीता। जनकप्रिया गह पाय पुनीता।।
देबि उचित असि बिनय तुम्हारी। दसरथ घरिनि राम महतारी।।
स्रोत अभिलेख 2.285 · पुस्तक पृ. 581, 582
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 लखि सनेह सुनि बचन बिनीता। जनकप्रिया गह पाय पुनीता।।
English explanation
AI draft: Seeing her affection and hearing her humble words, Janaka’s wife Sunayana clasped Kaushalya’s holy feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखि | देखकर | having seen |
| सनेह | स्नेह | affection |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बचन | वचन | words |
| बिनीता | विनम्र | humble |
| जनकप्रिया | जनक की पत्नी सुनयना | Sunayana, Janaka’s wife |
| गह | पकड़ लिए | clasped |
| पाय | चरण | feet |
| पुनीता | पवित्र | holy |
2 देबि उचित असि बिनय तुम्हारी। दसरथ घरिनि राम महतारी।।
English explanation
Lady, such humility befits you, the wife of Dasharatha and mother of Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देबि | हे देवी | O lady |
| उचित | उचित | befitting |
| असि | ऐसी | such |
| बिनय | विनम्र प्रार्थना | humble request |
| तुम्हारी | आपकी | your |
| दसरथ | राजा दशरथ की | of King Dasharatha |
| घरिनि | पत्नी | wife |
| राम | राम की | of Rama |
| महतारी | माता | mother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.285
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 581
- सहायक विषय
- कौसल्या-सुनयना-संवाद, श्रीसीताजीका शील
- मुद्रित पृष्ठ
- 581, 582
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।